आखिर पाटने सोसायटी के चुनाव में प्रस्थापितोकी युवाओ ने अच्छी पिटाई ही की । दस शीटे जीतकर उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की और नया इतिहास रचा । गणेश जी की जयन्ती और सोसायटी के जीते उम्मीदवारों का वह जुलुस रात के दस बजे तक गाव भर गूंजता रहा। पटाको की दहाड़ो ने सब को घर के बाहर आने को मजबूर किया। सालो साल जितने वालो की हार का यह जस्न देर रात तक चलता रहा। जीत तो जीत ही होती है। परिवर्तन ने सही मायने में परिवर्तन जो लाया है । देर रात तक लोग आते रहे और बधाईया देते रहे। मुझे जैसे लगा कितने दिनों के बाद गली में चाँद निकला।
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